Tuesday, April 27, 2010

साईंराम ॐ
"जैसी हमारी भक्ति होगी वैसी ही हमारी प्राप्ति होगी I"

यहाँ मनुष्य की चतुराई, विचार, कल्पना और सिद्धन्त किसी काम नहीं आते; जो उच्चतम अवस्था को प्राप्त करना चाहते है, उन्हें अहंकार को त्याग कर आचरण करना चाहिए I

अपने गुरु के चरणों मे पूर्ण समर्पण करना या अपने शिष्य को हर प्रकार से अपना मान लेने से अच्छी अवस्था अन्य कोई नहीं है I ऐसे सम्बन्ध के बिना कोई भी इस सांसारिक जीवन के भवसागर को पार नहीं कर सकता I

om sai ram
मंत्र, तीर्थ, ब्राह्मण, वैद्य, ज्योत्षी, ईशवर और गुरु मे जैसा तुम्हरा विशवास होगा, वैसा ही तुम्हे फल मिलेगा I
यद्यपि प्रत्येक पुराण में अनेक देवी देवताओं का वर्णन हुआ है तथा प्रत्येक पुराण में अनेक विषयों का समाहार है तथापि शिव पुराण, भविष्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण, लिंग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण एवं मत्स्य पुराण आदि में ‘शिव' को; विष्णु पुराण, नारदीय पुराण, गरुड़ पुराण एवं भागवत पुराण आदि में ‘विष्णु' को; ब्रह्म पुराण एवं पद्म पुराण में ‘ब्रह्मा' को तथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में ‘सूर्य' को अन्य देवताओं का स्रष्टा माना गया है!

माया परमात्मा की रचना है और यह जग माया की रचना है I 'प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला संसार ब्रह्म है' अर्थार्त यह तीनो यानि परमात्मा, माया और संसार एक ही है I

जिस प्रकार सूर्य अंधकार मे नहीं रह सकता, उसी प्रकार सिद्ध पुरुष द्वेत अवस्था मे नहीं रह सकता ; क्योंकि संपूर्ण ब्रह्माण्ड उसी मे समाया हुआ है और वह अद्वेत मे निवास करता है I

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