Friday, November 26, 2010

Runner Up Trophy 2010


‎9th December ..Football Championship Final Match In Ramgarh ....Jharkhand...!!
Winner And Runner Up Trophy 2010-2011....!!
Organised By New Savera Educational Society (Regd)

Winner Trophy 2010


‎9th December ..Football Championship Final Match In Ramgarh ....Jharkhand...!!
Winner And Runner Up Trophy 2010-2011....!!
Organised By New Savera Educational Society (Regd)

Winner And Runner Up Trophy 2010-2011


‎9th December ..Football Championship Final Match In Ramgarh ....Jharkhand...!!
Winner And Runner Up Trophy 2010-2011....!!
Organised By New Savera Educational Society (Regd)

Monday, November 15, 2010

ईद मुबारक


न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी के ओर से आप सभी को ईद मुबारक ....

Sunday, November 7, 2010

NEW SAVERA EDUCATIONAL SOCIETY

JAGRUKTA ABHIYAAN & SARI VITRAN ( BOKARO ) JHARKHAND

Thursday, November 4, 2010

New Savera Educational Society Ke taraf se aap aur aapke parivaar ke logo ko ( DIWALI ) ki haardik shub kaamnaayein.
NAVIN KUMAR...
CHAIRMAN..

Sunday, October 31, 2010

DSCI0382 ( NEW SAVERA EDUCATIONAL SOCIETY )

"PARTAND FOOTBALL GROUND" "RAMGARH ( JHARKHAND )"



Wednesday, August 18, 2010

चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु || हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है || 1 ||जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है || 2 ||जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है || 3
नवीन कुमार

Wednesday, August 11, 2010

हैप्पी Independence डे

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे, शहीदों की कुर्वानी बदनाम नहीं होने देंगे, बची हो जो एक बूँद भी गरम लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलम नहीं होने देंगे .... हैप्पी Independence डे......
नवीन कुमार

Tuesday, June 15, 2010

जय सरस्वती माँ, यह सब सीखना ही धर्म शिक्षा है है

जय सरस्वती माँ, यह सब सीखना ही धर्म शिक्षा है है
============================
* जैसा व्यवहार आप दूसरो से अपने लिए नहीं चाहते वैसा व्यवहार आप दूसरो के साथ न करे
* आप नहीं चाहते की आप से कोई घृणा करे, आप भी दूसरो से घृणा मत करो
* आप नहीं चाहते की आप से कोई झूठ बोले, आप भी किसी से झूठ न बोले
* आप नहीं चाहते की आप को कोई धोखा दे, आप भी किसी को धोखा न दे
*आप नहीं चाहते की कोई आप के साथ बईमानी, आप भी किसी के साथ बईमानी मत करो
* आप नहीं चाहते की आप को कोई सताए, आप भी किसी को मत सतायो

Monday, June 14, 2010

nses


ज्ञान जय सरस्वती माँ
============
आवश्यकता सभी बुराइयो का जड़ है, इसलिए जो मिलता है उसी मै खुश रहना चाहिए सफलता का पूंजी ईमानदारी है .........

ज्ञान -जय सरस्वती माँ (न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी) खुद कमाओ खुद खाओ यह मानव की प्रकृति है कमाओ नहीं छीन कर खाओ यह मानव की विकृति है खुद कमाओ दूसरो को खिलाओ यही हमारी संस्कृति है नमस्कार नवीन कुमार
ज्ञान ( जय सरस्वती माँ ) जो व्यक्ति दुःख का सामना करने से डरता है, उसे सुख का आशा नहीं करना चाहिए.......

Tuesday, April 27, 2010

साईंराम ॐ
"जैसी हमारी भक्ति होगी वैसी ही हमारी प्राप्ति होगी I"

यहाँ मनुष्य की चतुराई, विचार, कल्पना और सिद्धन्त किसी काम नहीं आते; जो उच्चतम अवस्था को प्राप्त करना चाहते है, उन्हें अहंकार को त्याग कर आचरण करना चाहिए I

अपने गुरु के चरणों मे पूर्ण समर्पण करना या अपने शिष्य को हर प्रकार से अपना मान लेने से अच्छी अवस्था अन्य कोई नहीं है I ऐसे सम्बन्ध के बिना कोई भी इस सांसारिक जीवन के भवसागर को पार नहीं कर सकता I

om sai ram
मंत्र, तीर्थ, ब्राह्मण, वैद्य, ज्योत्षी, ईशवर और गुरु मे जैसा तुम्हरा विशवास होगा, वैसा ही तुम्हे फल मिलेगा I
यद्यपि प्रत्येक पुराण में अनेक देवी देवताओं का वर्णन हुआ है तथा प्रत्येक पुराण में अनेक विषयों का समाहार है तथापि शिव पुराण, भविष्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण, लिंग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण एवं मत्स्य पुराण आदि में ‘शिव' को; विष्णु पुराण, नारदीय पुराण, गरुड़ पुराण एवं भागवत पुराण आदि में ‘विष्णु' को; ब्रह्म पुराण एवं पद्म पुराण में ‘ब्रह्मा' को तथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में ‘सूर्य' को अन्य देवताओं का स्रष्टा माना गया है!

माया परमात्मा की रचना है और यह जग माया की रचना है I 'प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला संसार ब्रह्म है' अर्थार्त यह तीनो यानि परमात्मा, माया और संसार एक ही है I

जिस प्रकार सूर्य अंधकार मे नहीं रह सकता, उसी प्रकार सिद्ध पुरुष द्वेत अवस्था मे नहीं रह सकता ; क्योंकि संपूर्ण ब्रह्माण्ड उसी मे समाया हुआ है और वह अद्वेत मे निवास करता है I

भगवान समझाते है ......तुम्हारा कोई कुछ छीन नहीं लेगा, तुम अपने स्वरूप को पहचानो ......तुम चैतन्य आत्मा हो ! अनित्य है तो यह शरीर और नित्य है यह आत्मा ; मिटने वाला तत्व तो है शरीर और जो मिटने वाला है उसकी चिंता क्यों करते हो -- आएगी जाएगी मिलेगी छूटेगी ----संसार है ही संयोग तथा वियोग का स्वरूप ! !

Thursday, April 22, 2010

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी
हर एक धर्म को मुहब्बत की सीख देता है साईं फकीर ही बादशाहों को भीख देता है बाबा के नित्य कार्यो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान जहाँ खड़े होकर बाबा बायेजा माँ से भिक्षा मांगते थे. हे साईं ! हमे आशीर्वाद दो की षडरिपुओ (छः चारित्रिक दोष: काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, अतिसा...र) को हम तुम्हे भिक्षा में देकर स्वयं को तुम्हारे चरणों में अर्पित कर दें. हमारे इन दोषों को स्वयं में विलीन करके हमें मुक्ति देने वाले शिव-शम्भू आप ही हो बाबा

Wednesday, April 21, 2010

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)

"जो तुझ भावे सोई भली कर"
जो तू चाहे, जो तू करे वो ही अच्छा है,जो तू मुझे दे वो भी अच्छा, जो तू मुझे न दे, वो भी अच्छा! मै नासमझ क्या कर सकता हु, मै ना समझ तो नासमझिया ही तो कर सकता हु, मै नासमझ क्या मांग सकता हु? एक बच्चा मांगेंगा भी तो क्या? खिलौना या चौकलेट इससे ज्यादा क्या मांगेंगा? मै क्या मांगता हु इसपे ध्यान मत देना हे परमपिता, जो तू दे वो भी अच्छा,जो तू ना दे वो भी अच्छा समुद्र की सतह पे एक लहर है उसकी इच्छा ही क्या हो सकती है?वो इच्छा करे भी तो क्या फ़ायदा? क्युकी थोडी देर बाद वो लहर भी मिट जाएँगी! जो सागर की इच्छा, वो लहर की इच्छा हो जाये, और जो तेरी इच्छा है परमपिता वो मेरी इच्छा हो जाये!
"हुकुम रजाई चलना नानक लिखिया नाल"
तेरे ही हुकुम पे चलू, एसा हो जाये कुछ, तू जानता है की सही क्या है, क्युकी तू कल भी था तेरे को कल का भी पता है, तू आज भी है तेरे को आज का भी पता है, तू कल भी होंगा, की कल क्या चाहिए वो भी तुझे पता है, मुझे क्या मालूम कुछ? इसलिए तू जो करेंगा वो ही सही होंगा! तू सदा सलामत निरंकार, तू आद् सच है जुगात सच है तू कल भी सच होंगा तू ही तू होंगा, तेरी ही मर्जी

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)

भूर्भुव: स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः
प्रचोदयात्
हिन्दी में भावार्थ
- प्राथमिक ध्वनि,
भू: - पदार्थ और ऊर्जा
भुव: - अन्‍तरि‍क्ष
स्‍व: - आत्‍मा
भर्ग - शुद्धस्‍वरूप और पवि‍त्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्‍वरूप ईश्‍
भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्‍तरि‍क्ष और आत्‍मा में वि‍चरण करने वाला शुद्धस्‍वरूप और पवि‍त्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्‍वरूप ईश्‍वर
तत् - वह, उस
सवि‍तु: - सूर्य, प्रेरक
वरेण्‍यं - पूज्‍य
भर्ग: - शुद्ध स्‍वरूप
देवस्‍य - देवता का, देवता को
तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्‍य, शुद्ध स्‍वरूप देवता को
धीमहि‍ - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि‍ धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करें
धि‍य: - बुद्धि‍, समझ
य: - वह (ईश्वर)
न: - हमारी
प्रचोदयात् - अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करे
धियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि‍ को अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करे
पूरा अर्थ - पदार्थ, ऊर्जा, अन्‍तरि‍क्ष और आत्‍मा में वि‍चरण करने वाले उस प्रेरक, पूज्‍य, शुद्ध स्‍वरूप देवता का हम ध्यान करें और वह हमारी बुद्धि‍ को अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करे।

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)
भूर्भुव: स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हिन्दी में भावार्थ
ॐ - प्राथमिक ध्वनि, ईश्वरभू: - पदार्थ और ऊर्जाभुव: - अन्‍तरि‍क्षस्‍व: - आत्‍माभर्ग - शुद्धस्‍वरूप और पवि‍त्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्‍वरूप ईश्‍वरॐ भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्‍तरि‍क्ष और आत्‍मा में वि‍चरण करने वाला शुद्धस्‍वरूप और पवि‍त्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्‍वरूप ईश्‍वरतत् - वह, उससवि‍तु: - सूर्य, प्रेरकवरेण्‍यं - पूज्‍यभर्ग: - शुद्ध स्‍वरूपदेवस्‍य - देवता का, देवता कोतत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्‍य, शुद्ध स्‍वरूप देवता कोधीमहि‍ - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि‍ धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करेंधि‍य: - बुद्धि‍, समझय: - वह (ईश्वर)न: - हमारीप्रचोदयात् - अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करेधियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि‍ को अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करेपूरा अर्थ - पदार्थ, ऊर्जा, अन्‍तरि‍क्ष और आत्‍मा में वि‍चरण करने वाले उस प्रेरक, पूज्‍य, शुद्ध स्‍वरूप देवता का हम ध्यान करें और वह हमारी बुद्धि‍ को अच्‍छे कामों में प्रवृत्‍त करे।

Tuesday, April 6, 2010

न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी.
NEW SAVERA EDUCATIONAL SOCIETY.

हिन्दी है हम वतन है .........माना की आज हम सारे संसार पर छा रहे है हर जगह अपना परचम लहरा रहे है लेकीन हमारी मात्र भाषा को अपनाने से क्यों कतरा रहे है ???माना की प्रगती के लीये अंग्रेजी जरुरी है लेकीन अपने ही देश में हमारी ही भाषा कीये दुर्गती क्यों है ???हर देश की पहचान उसकी संस्कृती और भाषा से होती है अगर हम ही इसकी उपेक्षा करेंगे तो शायद आने वाला पल हमे भारतीय नहीं कुछ और ही कहेगा ये हमारा एक प्रयाश है हमारी भाषा को फीर से जीवंत करने का ये हमारा एक प्रयाश है हमारे वतन को फीर से भारत बनाने कामेरा सबसे अनुरोध है अपना कुछ कीमती वक़्त हमारी भाषा के नाम करे मुझे आप सबके सहयोग की जरुरत है आईये ताकी फीर से हम वो गीत गुनगुना सके हिन्दी है हम वतन है ...........................जय हिन्द जय भारत
navinkumar
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे। कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है - 'मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं ' - हमें अपना मददगार हाथ देंवे। नवीन कुमार

Friday, March 19, 2010

Facebook | Navin Kumar

Facebook Navin Kumar


जय माता दी, जय साईं राम, मनुष्य मै अभिमान तब आता है जब वह अपने आपको सब कुछ समझने लगता है नवीन कुमार

Thursday, March 18, 2010

तुक्वंदी

तुक्वंदी (नवीन कुमार )
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दुकान मै राशन का नेता को भासन का और छात्रों मै अनुशासन का बड़ा ही महत्त्व है जुलुश मै झंडा का झगडे मै डंडा का और तीर्थो मै पंडा का बड़ा ही महत्त्व है
जय हिन्द जय भारत
इ मेल - नवीनटिपला@याहू .इन

______ॐ श्री साईं नाथाय नमः_______

______ॐ श्री साईं नाथाय नमः_______

Gmail - [HamareSaiBaba] SHRI SAI SATCHARITA (part-48) - navintipla@gmail.com

http://mail.google.com/mail/?hl=en&shva=1#inbox/12741e171fca118a

Thursday, February 18, 2010

Tuesday, February 2, 2010

WAQT NAHI "
Har khushi Hai Logon Ke Daman Mein,
Par Ek Hansi Ke Liye Waqt Nahi.
Din Raat Daudti Duniya Mein,
Zindagi Ke Liye Hi Waqt Nahi
.

Maa Ki Loree Ka Ehsaas To Hai,
Par Maa Ko Maa Kehne Ka Waqt Nahi.
Saare Rishton Ko To Hum Maar Chuke,
Ab Unhe Dafnane Ka Bhi Waqt Nahi.

Saare Naam Mobile Mein Hain,
Par Dosti Ke Lye Waqt Nahi.
Gairon Ki Kya Baat Karen,
Jab Apno Ke Liye Hi Waqt Nahi.

Aankhon Me Hai Neend Bhari,
Par Sone Ka Waqt Nahi.
Dil Hai Ghamon Se Bhara Hua,
Par Rone Ka Bhi Waqt Nahi .

Paison ki Daud Me Aise Daude,
Ki Thakne ka Bhi Waqt Nahi.
Paraye Ehsason Ki Kya Kadr Karein,
Jab Apane Sapno Ke Liye Hi Waqt Nahi.

Tu Hi Bata E Zindagi,
Iss Zindagi Ka Kya Hoga,
Ki Har Pal Marne Walon Ko,
Jeene Ke Liye Bhi Waqt Nahi.........
jai hind jai bharat.........
navin kumar

Tuesday, January 26, 2010

26 january celebration

Hi every body happy republic day to all of you! jai hind jai bharat mata ki jai

jai hind....sir

HAPPY REPUBLIC DAY. JAI HIND JAI BHARAT.........