जय सरस्वती माँ, यह सब सीखना ही धर्म शिक्षा है है
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* जैसा व्यवहार आप दूसरो से अपने लिए नहीं चाहते वैसा व्यवहार आप दूसरो के साथ न करे
* आप नहीं चाहते की आप से कोई घृणा करे, आप भी दूसरो से घृणा मत करो
* आप नहीं चाहते की आप से कोई झूठ बोले, आप भी किसी से झूठ न बोले
* आप नहीं चाहते की आप को कोई धोखा दे, आप भी किसी को धोखा न दे
*आप नहीं चाहते की कोई आप के साथ बईमानी, आप भी किसी के साथ बईमानी मत करो
* आप नहीं चाहते की आप को कोई सताए, आप भी किसी को मत सतायो
सच्ची और अच्छी सीख - यही सोच बनी रहे - शुभकामनाएं
ReplyDeleteबहुत अच्छी बातें करते हैं आप सदाचार ही जीवन की पूंजी है
ReplyDeleteachchi pastuti
ReplyDeleteसामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वाले हर व्यक्ति का स्वागत और सम्मान करना प्रत्येक भारतीय नागरिक का नैतिक कर्त्तव्य है। इसलिये हम प्रत्येक सृजनात्कम कार्य करने वाले के प्रशंसक एवं समर्थक हैं, खोखले आदर्श कागजी या अन्तरजाल के घोडे दौडाने से न तो मंजिल मिलती हैं और न बदलाव लाया जा सकता है। बदलाव के लिये नाइंसाफी के खिलाफ संघर्ष ही एक मात्र रास्ता है।
ReplyDeleteअतः समाज सेवा या जागरूकता या किसी भी क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को जानना बेहद जरूरी है कि इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम होता जा है। सरकार द्वारा जनता से टेक्स वूसला जाता है, देश का विकास एवं समाज का उत्थान करने के साथ-साथ जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों द्वारा इस देश को और देश के लोकतन्त्र को हर तरह से पंगु बना दिया है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, व्यवहार में लोक स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को भ्रष्टाचार के जरिये डकारना और जनता पर अत्याचार करना प्रशासन ने अपना कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं। ऐसे में, मैं प्रत्येक बुद्धिजीवी, संवेदनशील, सृजनशील, खुद्दार, देशभक्त और देश तथा अपने एवं भावी पीढियों के वर्तमान व भविष्य के प्रति संजीदा व्यक्ति से पूछना चाहता हूँ कि केवल दिखावटी बातें करके और अच्छी-अच्छी बातें लिखकर क्या हम हमारे मकसद में कामयाब हो सकते हैं? हमें समझना होगा कि आज देश में तानाशाही, जासूसी, नक्सलवाद, लूट, आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका एक बडा कारण है, भारतीय प्रशासनिक सेवा के भ्रष्ट अफसरों के हाथ देश की सत्ता का होना।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-"भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान" (बास)- के सत्रह राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से मैं दूसरा सवाल आपके समक्ष यह भी प्रस्तुत कर रहा हूँ कि-सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! क्या हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवक से लोक स्वामी बन बैठे अफसरों) को यों हीं सहते रहेंगे?
जो भी व्यक्ति इस संगठन से जुडना चाहे उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्त करने के लिये निम्न पते पर लिखें या फोन पर बात करें :
डॉ. पुरुषोत्तम मीणा, राष्ट्रीय अध्यक्ष
भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666, E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in
शुभकामनाओं सहित।-डॉ. पुरुषोत्तम मीणा निरंकुश, सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक समाचार-पत्र) एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास) (जो दिल्ली से देश के सत्रह राज्यों में संचालित है। इस संगठन ने आज तक किसी गैर-सदस्य, या सरकार या अन्य बाहरी किसी भी व्यक्ति से एक पैसा भी अनुदान ग्रहण नहीं किया है।
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---मीणा जी ,सन्स्थाएं खोल लेना, बना लेना, दूसरों को गाली देना, दोष देना बडा आसान है; आज देश में एसी हज़ारों सन्स्थाएं खुली हैं, जिसे जरा कष्ट हुआ , दूसरों को ्दोष/गाली देकर सन्स्था/ अखबार खोलकर स्वयं गुट बनालेता है। पर सब कुछ वही का वही है???
ReplyDelete---जरा सोचें--ये अफ़सर, नेता, प्रशासन के लोग क्या ऊपर से ये या बाहर से आये देवता/ राक्षस या मानव, अलियन्स हें---नहीं न , सब आप में से ही हैं ---तो ये क्यों कुर्सी पर बैठते ही एसे हो जाते हैं????
---वास्तव में मानवता में ही गिरावत आयी है, आप/हम/ वह/सभी दोषी हैं , अपने को सुधारो सब अपने आप ठीक हो जायेगा। गुट बनाना बन्द करो।
-- ये वर्ड वेरीफ़िकशन क्यों लगाया है, ये क्या एसा सूक्ष्म-सिक्योरिटी का मामला है जो कोई चुरा लेगा ? ब्लोग में एसा क्या सम्बेदनशील मामला होता है जो लोग वेरीफ़िकशन लगाते हैं।
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