साईंराम ॐ
"जैसी हमारी भक्ति होगी वैसी ही हमारी प्राप्ति होगी I"
यहाँ मनुष्य की चतुराई, विचार, कल्पना और सिद्धन्त किसी काम नहीं आते; जो उच्चतम अवस्था को प्राप्त करना चाहते है, उन्हें अहंकार को त्याग कर आचरण करना चाहिए I
अपने गुरु के चरणों मे पूर्ण समर्पण करना या अपने शिष्य को हर प्रकार से अपना मान लेने से अच्छी अवस्था अन्य कोई नहीं है I ऐसे सम्बन्ध के बिना कोई भी इस सांसारिक जीवन के भवसागर को पार नहीं कर सकता I
om sai ram
मंत्र, तीर्थ, ब्राह्मण, वैद्य, ज्योत्षी, ईशवर और गुरु मे जैसा तुम्हरा विशवास होगा, वैसा ही तुम्हे फल मिलेगा I
यद्यपि प्रत्येक पुराण में अनेक देवी देवताओं का वर्णन हुआ है तथा प्रत्येक पुराण में अनेक विषयों का समाहार है तथापि शिव पुराण, भविष्य पुराण, मार्कण्डेय पुराण, लिंग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, ब्रह्माण्ड पुराण एवं मत्स्य पुराण आदि में ‘शिव' को; विष्णु पुराण, नारदीय पुराण, गरुड़ पुराण एवं भागवत पुराण आदि में ‘विष्णु' को; ब्रह्म पुराण एवं पद्म पुराण में ‘ब्रह्मा' को तथा ब्रह्म वैवर्त पुराण में ‘सूर्य' को अन्य देवताओं का स्रष्टा माना गया है!
माया परमात्मा की रचना है और यह जग माया की रचना है I 'प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला संसार ब्रह्म है' अर्थार्त यह तीनो यानि परमात्मा, माया और संसार एक ही है I
जिस प्रकार सूर्य अंधकार मे नहीं रह सकता, उसी प्रकार सिद्ध पुरुष द्वेत अवस्था मे नहीं रह सकता ; क्योंकि संपूर्ण ब्रह्माण्ड उसी मे समाया हुआ है और वह अद्वेत मे निवास करता है I
Thursday, April 22, 2010
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी
हर एक धर्म को मुहब्बत की सीख देता है साईं फकीर ही बादशाहों को भीख देता है बाबा के नित्य कार्यो से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान जहाँ खड़े होकर बाबा बायेजा माँ से भिक्षा मांगते थे. हे साईं ! हमे आशीर्वाद दो की षडरिपुओ (छः चारित्रिक दोष: काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, अतिसा...र) को हम तुम्हे भिक्षा में देकर स्वयं को तुम्हारे चरणों में अर्पित कर दें. हमारे इन दोषों को स्वयं में विलीन करके हमें मुक्ति देने वाले शिव-शम्भू आप ही हो बाबा
Wednesday, April 21, 2010
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)
"जो तुझ भावे सोई भली कर"
जो तू चाहे, जो तू करे वो ही अच्छा है,जो तू मुझे दे वो भी अच्छा, जो तू मुझे न दे, वो भी अच्छा! मै नासमझ क्या कर सकता हु, मै ना समझ तो नासमझिया ही तो कर सकता हु, मै नासमझ क्या मांग सकता हु? एक बच्चा मांगेंगा भी तो क्या? खिलौना या चौकलेट इससे ज्यादा क्या मांगेंगा? मै क्या मांगता हु इसपे ध्यान मत देना हे परमपिता, जो तू दे वो भी अच्छा,जो तू ना दे वो भी अच्छा समुद्र की सतह पे एक लहर है उसकी इच्छा ही क्या हो सकती है?वो इच्छा करे भी तो क्या फ़ायदा? क्युकी थोडी देर बाद वो लहर भी मिट जाएँगी! जो सागर की इच्छा, वो लहर की इच्छा हो जाये, और जो तेरी इच्छा है परमपिता वो मेरी इच्छा हो जाये!
"हुकुम रजाई चलना नानक लिखिया नाल"
तेरे ही हुकुम पे चलू, एसा हो जाये कुछ, तू जानता है की सही क्या है, क्युकी तू कल भी था तेरे को कल का भी पता है, तू आज भी है तेरे को आज का भी पता है, तू कल भी होंगा, की कल क्या चाहिए वो भी तुझे पता है, मुझे क्या मालूम कुछ? इसलिए तू जो करेंगा वो ही सही होंगा! तू सदा सलामत निरंकार, तू आद् सच है जुगात सच है तू कल भी सच होंगा तू ही तू होंगा, तेरी ही मर्जी
जो तू चाहे, जो तू करे वो ही अच्छा है,जो तू मुझे दे वो भी अच्छा, जो तू मुझे न दे, वो भी अच्छा! मै नासमझ क्या कर सकता हु, मै ना समझ तो नासमझिया ही तो कर सकता हु, मै नासमझ क्या मांग सकता हु? एक बच्चा मांगेंगा भी तो क्या? खिलौना या चौकलेट इससे ज्यादा क्या मांगेंगा? मै क्या मांगता हु इसपे ध्यान मत देना हे परमपिता, जो तू दे वो भी अच्छा,जो तू ना दे वो भी अच्छा समुद्र की सतह पे एक लहर है उसकी इच्छा ही क्या हो सकती है?वो इच्छा करे भी तो क्या फ़ायदा? क्युकी थोडी देर बाद वो लहर भी मिट जाएँगी! जो सागर की इच्छा, वो लहर की इच्छा हो जाये, और जो तेरी इच्छा है परमपिता वो मेरी इच्छा हो जाये!
"हुकुम रजाई चलना नानक लिखिया नाल"
तेरे ही हुकुम पे चलू, एसा हो जाये कुछ, तू जानता है की सही क्या है, क्युकी तू कल भी था तेरे को कल का भी पता है, तू आज भी है तेरे को आज का भी पता है, तू कल भी होंगा, की कल क्या चाहिए वो भी तुझे पता है, मुझे क्या मालूम कुछ? इसलिए तू जो करेंगा वो ही सही होंगा! तू सदा सलामत निरंकार, तू आद् सच है जुगात सच है तू कल भी सच होंगा तू ही तू होंगा, तेरी ही मर्जी
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)
ॐ भूर्भुव: स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः
प्रचोदयात्॥
हिन्दी में भावार्थ
ॐ - प्राथमिक ध्वनि,
भू: - पदार्थ और ऊर्जा
भुव: - अन्तरिक्ष
स्व: - आत्मा
भर्ग - शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्
ॐ भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाला शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वर
तत् - वह, उस
सवितु: - सूर्य, प्रेरक
वरेण्यं - पूज्य
भर्ग: - शुद्ध स्वरूप
देवस्य - देवता का, देवता को
तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता को
धीमहि - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करें
धिय: - बुद्धि, समझ
य: - वह (ईश्वर)
न: - हमारी
प्रचोदयात् - अच्छे कामों में प्रवृत्त करे
धियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करे
प्रचोदयात्॥
हिन्दी में भावार्थ
ॐ - प्राथमिक ध्वनि,
भू: - पदार्थ और ऊर्जा
भुव: - अन्तरिक्ष
स्व: - आत्मा
भर्ग - शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्
ॐ भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाला शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वर
तत् - वह, उस
सवितु: - सूर्य, प्रेरक
वरेण्यं - पूज्य
भर्ग: - शुद्ध स्वरूप
देवस्य - देवता का, देवता को
तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता को
धीमहि - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करें
धिय: - बुद्धि, समझ
य: - वह (ईश्वर)
न: - हमारी
प्रचोदयात् - अच्छे कामों में प्रवृत्त करे
धियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करे
पूरा अर्थ - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाले उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता का हम ध्यान करें और वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करे।
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी ( REGD.)
ॐ भूर्भुव: स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
हिन्दी में भावार्थ
ॐ - प्राथमिक ध्वनि, ईश्वरभू: - पदार्थ और ऊर्जाभुव: - अन्तरिक्षस्व: - आत्माभर्ग - शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वरॐ भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाला शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वरतत् - वह, उससवितु: - सूर्य, प्रेरकवरेण्यं - पूज्यभर्ग: - शुद्ध स्वरूपदेवस्य - देवता का, देवता कोतत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता कोधीमहि - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करेंधिय: - बुद्धि, समझय: - वह (ईश्वर)न: - हमारीप्रचोदयात् - अच्छे कामों में प्रवृत्त करेधियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करेपूरा अर्थ - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाले उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता का हम ध्यान करें और वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करे।
ॐ - प्राथमिक ध्वनि, ईश्वरभू: - पदार्थ और ऊर्जाभुव: - अन्तरिक्षस्व: - आत्माभर्ग - शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वरॐ भूर्भुव: स्वः - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाला शुद्धस्वरूप और पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्म स्वरूप ईश्वरतत् - वह, उससवितु: - सूर्य, प्रेरकवरेण्यं - पूज्यभर्ग: - शुद्ध स्वरूपदेवस्य - देवता का, देवता कोतत् सवितुर्वरेण्यम् भर्गो - उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता कोधीमहि - हमारा मन अथवा हमारी बुद्धि धारण करे, हम उसका मनन, ध्यान करेंधिय: - बुद्धि, समझय: - वह (ईश्वर)न: - हमारीप्रचोदयात् - अच्छे कामों में प्रवृत्त करेधियो यो नः प्रचोदयात् - वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करेपूरा अर्थ - पदार्थ, ऊर्जा, अन्तरिक्ष और आत्मा में विचरण करने वाले उस प्रेरक, पूज्य, शुद्ध स्वरूप देवता का हम ध्यान करें और वह हमारी बुद्धि को अच्छे कामों में प्रवृत्त करे।
Tuesday, April 6, 2010
न्यू सवेरा एजुकेशनल सोसाइटी.
NEW SAVERA EDUCATIONAL SOCIETY.
NEW SAVERA EDUCATIONAL SOCIETY.
हिन्दी है हम वतन है .........माना की आज हम सारे संसार पर छा रहे है हर जगह अपना परचम लहरा रहे है लेकीन हमारी मात्र भाषा को अपनाने से क्यों कतरा रहे है ???माना की प्रगती के लीये अंग्रेजी जरुरी है लेकीन अपने ही देश में हमारी ही भाषा कीये दुर्गती क्यों है ???हर देश की पहचान उसकी संस्कृती और भाषा से होती है अगर हम ही इसकी उपेक्षा करेंगे तो शायद आने वाला पल हमे भारतीय नहीं कुछ और ही कहेगा ये हमारा एक प्रयाश है हमारी भाषा को फीर से जीवंत करने का ये हमारा एक प्रयाश है हमारे वतन को फीर से भारत बनाने कामेरा सबसे अनुरोध है अपना कुछ कीमती वक़्त हमारी भाषा के नाम करे मुझे आप सबके सहयोग की जरुरत है आईये ताकी फीर से हम वो गीत गुनगुना सके हिन्दी है हम वतन है ...........................जय हिन्द जय भारत
navinkumar
अगर आगे से कभी आपके घर में पार्टी हो और खाना बच जाये या बेकार जा रहा हो तो बिना झिझके आप 1098 (केवल भारत में )पर फ़ोन करें - यह एक मजाक नहीं है - यह चाइल्ड हेल्पलाइन है । वे आयेंगे और भोजन एकत्रित करके ले जायेंगे। कृप्या इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें इससे उन बच्चों का पेट भर सकता है - 'मदद करने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठो से अच्छे होते हैं ' - हमें अपना मददगार हाथ देंवे। नवीन कुमार
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